2026 me SEO aur AI Search ka badalta landscape: Chunautiya aur Avsar

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साल 2025 डिजिटल मार्केटिंग और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। यह वर्ष केवल तकनीकी बदलावों का नहीं बल्कि रणनीतिक सोच और ब्रांड निर्माण की नई दिशा का प्रतीक रहा। एआई सर्च के उदय ने पारंपरिक एसईओ की नींव को चुनौती दी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि एसईओ की भूमिका खत्म नहीं हुई है, बल्कि और अधिक जटिल और बहुआयामी हो गई है। गूगल ने इस दौरान कई नए पेटेंट दाखिल किए जिनमें थीमैटिक सर्च, पर्सनलाइजेशन और उपयोगकर्ता संदर्भ को प्राथमिकता दी गई। इसका अर्थ यह है कि अब खोज परिणाम केवल कीवर्ड पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि उपयोगकर्ता के व्यवहार, स्थान और ब्रांड पहचान को भी ध्यान में रखेंगे।

इस वर्ष GEO (Generative Engine Optimization) की चर्चा भी तेज रही। कई कंपनियों ने इसे भविष्य का समाधान बताया, लेकिन वास्तविकता यह रही कि यह अभी भी प्रयोगात्मक अवस्था में है। वर्डप्रेस ने एआई को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए और “Abilities API” जैसी घोषणाओं ने डेवलपर्स को नई संभावनाएँ दीं। वहीं, समुदाय में WP Engine विवाद ने यह भी दिखाया कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ पारदर्शिता और सहयोग की भावना बनाए रखना कितना आवश्यक है।

2025 की सबसे बड़ी सीख यही रही कि एसईओ अब केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ब्रांडिंग, उपयोगकर्ता अनुभव और एआई-आधारित रणनीतियों का सम्मिलित परिणाम है। जो कंपनियाँ इन तीनों पहलुओं को संतुलित करेंगी, वही आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगी। इस प्रकार, यह वर्ष चुनौतियों और अवसरों दोनों का संगम रहा, जिसने डिजिटल जगत को एक नई दिशा दी।

1. एआई सर्च और एसईओ की नई चुनौतियाँ

साल 2025 डिजिटल मार्केटिंग और एसईओ के लिए ऐतिहासिक रहा। शुरुआत में यह सवाल उठ रहा था कि एआई सर्च के दौर में पारंपरिक एसईओ की प्रासंगिकता कितनी रहेगी। लेकिन वर्ष के अंत तक यह स्पष्ट हो गया कि एसईओ अपनी केंद्रीय भूमिका बनाए रखेगा, हालांकि उसे नई वास्तविकताओं के अनुसार खुद को ढालना होगा। एआई आधारित खोज इंजन अब केवल कीवर्ड पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे उपयोगकर्ता के व्यवहार, ब्रांड पहचान और संदर्भ संकेतों को भी महत्व देते हैं। गूगल ने कई नए पेटेंट दाखिल किए जिनमें थीमैटिक सर्च और पर्सनलाइजेशन को प्रमुखता दी गई। इसका मतलब है कि अब खोज परिणाम केवल सामान्य लिंक नहीं होंगे, बल्कि उप-थीम और संदर्भ आधारित उत्तर भी सामने आएंगे। इस बदलाव ने एसईओ विशेषज्ञों को मजबूर किया कि वे केवल तकनीकी ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान न दें, बल्कि ब्रांड निर्माण और उपयोगकर्ता अनुभव को भी प्राथमिकता दें। गूगल के डैनी सुलिवन ने न्यूयॉर्क सर्च सेंट्रल लाइव इवेंट में स्पष्ट कहा कि ब्रांड पहचान ही वह कारक है जो भीड़ में अलग दिखने में मदद करता है। यदि लोग आपके नाम से खोज करते हैं, तो यह आपके लिए एक मजबूत संकेत है। इस प्रकार, 2025 ने यह साबित किया कि एसईओ अब केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि ब्रांडिंग और उपयोगकर्ता विश्वास का सम्मिलित परिणाम है।

2. GEO और LLMs.txt की बहस

2025 में GEO (Generative Engine Optimization) शब्द तेजी से लोकप्रिय हुआ। क्लाइंट्स ने एआई सर्च के लिए विशेष समाधान की मांग की, जिससे कई एसईओ कंपनियाँ GEO-विशिष्ट सेवाएँ देने लगीं। वर्डप्रेस प्लगइन्स ने भी GEO को अपनाने की कोशिश की और LLMs.txt नामक फीचर पेश किया। यह एक प्रस्तावित मानक है जो एआई को कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया, लेकिन अभी तक किसी बड़े एआई प्लेटफॉर्म ने इसे अपनाया नहीं है। दिलचस्प बात यह रही कि गूगल ने खुद थोड़े समय के लिए LLMs.txt का प्रयोग किया, जिसे बाद में हटा दिया गया। इससे GEO समर्थकों को यह कहने का मौका मिला कि गूगल भी इस मानक को मान्यता देता है, हालांकि वास्तविकता यह थी कि गूगल ने इसे अस्वीकार कर दिया। इस बहस ने यह स्पष्ट किया कि GEO अभी भी एक अधूरा विचार है और इसे एसईओ से अलग करना कठिन है। वर्डप्रेस प्लगइन Squirrly SEO ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि LLMs.txt का कोई प्रमाणित लाभ नहीं है। यह केवल भविष्य की तैयारी के तौर पर जोड़ा गया फीचर है। इस पूरे घटनाक्रम ने दिखाया कि उद्योग अभी भी प्रयोग और खोज के दौर में है। GEO को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन इसे ठोस रणनीति में बदलने के लिए समय और प्रमाण दोनों की आवश्यकता है।

3. गूगल के नए पेटेंट और एआई प्रगति

गूगल ने 2025 में कई महत्वपूर्ण पेटेंट दाखिल किए जो एआई और खोज एल्गोरिद्म को नई दिशा देते हैं। इनमें सबसे उल्लेखनीय थीमैटिक सर्च पेटेंट है, जो खोज परिणामों को उप-थीम में विभाजित कर सारांश प्रस्तुत करता है। इससे उपयोगकर्ताओं को अधिक सटीक और संदर्भित जानकारी मिलती है। इसके अलावा, गूगल ने पर्सनलाइजेशन पर भी ध्यान दिया। नए पेटेंट में समय, स्थान, उपयोगकर्ता का व्यवहार और डिवाइस संदर्भ जैसे कारकों को शामिल किया गया है ताकि एआई उत्तर अधिक व्यक्तिगत और सटीक हों। एक अन्य पेटेंट ने उपयोगकर्ता के व्यक्तिगत इतिहास पर आधारित खोज को संभव बनाया, जिससे लोग आसानी से यह जान सकें कि उन्होंने किसी विषय को कहाँ पढ़ा था—ईमेल में या वेबपेज पर। साथ ही, गूगल ने “सफिशिएंट कॉन्टेक्स्ट” नामक शोध प्रकाशित किया, जो यह निर्धारित करता है कि किसी कंटेंट में प्रश्न का उत्तर देने के लिए पर्याप्त जानकारी है या नहीं। इससे एआई में होने वाली ‘हैलुसिनेशन’ की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। MUVERA नामक तकनीक ने मल्टी-वेक्टर मॉडल्स को तेज और कुशल बनाया। इन सभी नवाचारों का सीधा असर एसईओ पर पड़ा है। अब कंटेंट निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका लेख पर्याप्त संदर्भ और विश्वसनीयता प्रदान करे। यह बदलाव पारंपरिक एसईओ से आगे बढ़कर एआई-आधारित खोज की नई दुनिया की ओर संकेत करता है।

4. वर्डप्रेस और एआई का भविष्य

वर्डप्रेस ने 2025 में एआई को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। “Abilities API” की घोषणा ने डेवलपर समुदाय में उत्साह पैदा किया। यह API बाहरी प्लगइन सुविधाओं को सुरक्षित और एकीकृत तरीके से जोड़ने की अनुमति देती है। इससे एआई आधारित समाधान वर्डप्रेस इकोसिस्टम में आसानी से काम कर पाएंगे। दिसंबर में हुए “State of the Word” इवेंट में सह-संस्थापक मैट मुलनवेग ने कहा कि भविष्य में सैकड़ों, बल्कि हजारों विशेष एआई मॉडल वर्डप्रेस वर्कफ़्लो में शामिल होंगे। ये मॉडल लोगो निर्माण, कंटेंट एडिटिंग और अन्य रचनात्मक कार्यों को सरल बनाएंगे। इसका उद्देश्य प्रकाशन प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाना है ताकि उपयोगकर्ता तकनीकी जटिलताओं से मुक्त होकर रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। हालांकि, वर्डप्रेस समुदाय में विवाद भी रहे। WP Engine के साथ संघर्ष ने नकारात्मक भावनाएँ पैदा कीं। मुलनवेग की आक्रामक रणनीति ने कई डेवलपर्स को नाराज़ किया। इसके बावजूद, तकनीकी दृष्टि से वर्डप्रेस ने एआई के साथ भविष्य की मजबूत नींव रखी है। यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में वर्डप्रेस केवल एक कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम नहीं रहेगा, बल्कि एआई-संचालित प्रकाशन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित होगा।

5. 2025 की चुनौतियाँ और निष्कर्ष

साल 2025 एसईओ और वर्डप्रेस दोनों के लिए संक्रमण का वर्ष रहा। गूगल ने रैंक ट्रैकर्स को ब्लॉक कर दिया, जिससे सर्च कंसोल में कम इंप्रेशन दिखने लगे और उद्योग में घबराहट फैल गई। इसके अलावा, एआई ओवरव्यूज़ और एआई मोड के कारण वेबसाइट ट्रैफिक में गिरावट दर्ज की गई। कई व्यवसायों ने शिकायत की कि गूगल के दावे के विपरीत क्लिक कम हो रहे हैं। वर्डप्रेस समुदाय में WP Engine विवाद ने नकारात्मक माहौल बनाया। मुलनवेग की रणनीति को कई लोगों ने अस्वीकार किया और इसे ओपन-सोर्स भावना के खिलाफ माना। इन चुनौतियों के बावजूद, 2025 ने यह साबित किया कि डिजिटल मार्केटिंग और प्रकाशन उद्योग लगातार बदल रहा है। एआई ने एसईओ को नई दिशा दी है और वर्डप्रेस ने भविष्य के लिए तकनीकी आधार तैयार किया है। निष्कर्षतः, यह वर्ष केवल उतार-चढ़ाव का नहीं बल्कि सीखने और अनुकूलन का भी रहा। 2026 में प्रवेश करते हुए यह स्पष्ट है कि जो कंपनियाँ ब्रांड निर्माण, उपयोगकर्ता अनुभव और एआई-आधारित रणनीतियों पर ध्यान देंगी, वही प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगी।

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